| अखिल भारतीय स्वर्णकार संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष, वरिष्ठ भाजपा नेता कश्मीर सिंह राजपूत। (ज़ीशान) |
कादियां, 24 जनवरी (ज़ीशान)- अखिल भारतीय स्वर्णकार संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा वरिष्ठ भाजपा नेता कश्मीर सिंह राजपूत ने पंजाब की आम आदमी पार्टी ('आप') सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए 'पंजाब केसरी' अख़बार समूह को दबाने की कोशिशों की कड़ी निंदा की है। बनारस में व्यस्थ श्री राजपूत ने सरकार की कार्रवाई को लोकतंत्र पर सीधा हमला करार दिया और चेतावनी दी कि प्रेस, जो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, पर चाबुक चलाना सत्ताधारी पक्ष के लिए "बुरे दिनों की निशानी" है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब भगवंत मान सरकार और मीडिया हाउस के बीच टकराव बढ़ा हुआ है। गौरतलब है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को अख़बार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने से रोक दिया था।
"इमरजेंसी के दौरान ट्रैक्टरों की रोशनी में चला अख़बार":
लोकतंत्र के काले दिनों को याद करते हुए राजपूत ने कहा, "मुझे अच्छी तरह याद है कि जब श्रीमती इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाई थी, तो इस अख़बार को बाकायदा ट्रैक्टरों और गैस (लैंप) की रोशनी में बहाल रखा गया और चलाया गया" । उन्होंने कहा कि इतने मुश्किल हालात में भी अख़बार ने लोगों के हकों की लड़ाई लड़ी ।
आतंकवाद के दौर में दिए बलिदान:
कश्मीर सिंह राजपूत ने पंजाब के काले दौर के दौरान चोपड़ा परिवार के बलिदानों का जिक्र करते हुए कहा कि इस परिवार ने लाला जी और रमेश जी के रूप में "अपने जिस्म का खून देकर" इस अख़बार को सींचा है ।
उन्होंने कहा, "मैं उन हालातों को जानता हूँ क्योंकि उस समय मैं खुद आतंकवादियों की हिट लिस्ट में रहा था। इस परिवार ने जितना दुःख देखा, शायद ही किसी और अख़बार या परिवार ने देखा हो" । राजपूत ने अफसोस जताया कि जिस अख़बार के हॉकरों और पत्रकारों ने जान की बाजी लगा दी, आज सरकार उसी संस्थान को निशाना बना रही है ।
"केजरीवाल की मुसीबत के समय भी अख़बार साथ खड़ा था":
'आप' नेतृत्व के रवैये पर हैरानी जताते हुए भाजपा नेता ने याद दिलाया कि 'पंजाब केसरी' ने हमेशा निष्पक्षता के साथ हर पार्टी का साथ दिया है ।
उन्होंने कहा, "जब भी केजरीवाल जी या इनके ग्रुप पर कोई मुसीबत की घड़ी आई... तो पंजाब केसरी ने बढ़-चढ़कर इनके हक में भी लिखा" । उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इन सारी बातों को "ताक पर रखकर" (भुलाकर) अख़बार के खिलाफ कदम उठाने शुरू कर दिए हैं, जो कि बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है ।
सरकार को चेतावनी:
राजपूत ने कहा कि अख़बार लोकतंत्र की रीढ़ की हड्डी होते हैं और जनता की आवाज़ को दबाया नहीं जाना चाहिए । अंत में उन्होंने 'पंजाब केसरी' से अपना म्यार (स्तर) इसी प्रकार सचाई पर कायम रखने और उसके लिए उनके हर प्रकार के सहयोग देने का आश्वासन दिलाते हुए अधिक बुलंदी के साथ लोगों की आवाज़ उठाने की अपील की ।
उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया की "पता नहीं आप सरकार द्वारा क्यों इस पेपर के विरुद्ध यह कदम उठाया है, या यह उनके बुरे दिनों की कोई निशानी का प्रतीक है"