| हज़रत मिर्ज़ा मसरूर अहमद टिलफोर्ड (यूके) से संबोधित करते हुए। (ज़ीशान) |
कादियां, 3 जनवरी (ज़ीशान) – अहमदिया मुस्लिम जमात के 130वें सालाना समारोह में विश्व प्रमुख हज़रत मिर्ज़ा मसरूर अहमद के समापन संबोधन में उन्होंने जमात को बैअत (निष्ठा की प्रतिज्ञा) की शर्तों पर दृढ़ता से अमल करने, नैतिक व आध्यात्मिक उन्नति, पाँच वक्त की नमाज़, दुआ, विनम्रता और मानवता के प्रति करुणा अपनाने का संदेश दिया।
हज़रत मिर्ज़ा मसरूर अहमद ने टिलफोर्ड (यूके) से संबोधित करते हुए कहा कि जलसा का उद्देश्य केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि इस्लाम की सच्ची शिक्षाओं को व्यवहार में उतारना है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सच्ची सफलता तक़वा (परहेज़गारी) में निहित है और बिना तक़वा दुआओं की क़बूलियत संभव नहीं। आधुनिक चुनौतियों, विशेषकर मीडिया व तकनीक के नकारात्मक प्रभावों से बचते हुए नैतिक पवित्रता बनाए रखने की भी उन्होंने अपील की।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बैअत आजीवन अनुबंध है, जिसमें शिर्क के हर रूप से दूर रहना, अहंकार त्यागना, और अल्लाह की सृष्टि के प्रति दया व सेवा का भाव अपनाना अनिवार्य है। समापन पर उन्होंने जमात को आत्म-मंथन और व्यवहारिक परिवर्तन की प्रेरणा दी तथा संस्थापक जमात अहमदिया की दुआओं के वारिस बनने का आह्वान किया।