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| साइबर ठगी और फर्जी डिजिटल अरेस्ट से संबंधत ए.आई. छाया। (ज़ीशान) |
कादियां, 13 मई (ज़ीशान): देशभर में साइबर ठगी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। ठग अब लोगों को डराकर और भ्रमित कर पैसे ऐंठने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ताजा मामलों में देखा गया है कि आरोपी व्हाट्सएप प्रोफाइल पर वरिष्ठ अधिकारियों की तस्वीर लगाकर खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को कॉल करते हैं और “डिजिटल अरेस्ट” जैसी झूठी धमकियां देकर पैसे मांगते हैं।
कादियां क्षेत्र की भावना नामक महिला के साथ भी ऐसा ही मामला सामने आया, जहां एक व्यक्ति ने कॉल कर खुद को अधिकारी बताते हुए उनके बेटे के पुलिस हिरासत में होने की झूठी जानकारी दी। परिवार ने तुरंत जांच की तो पता चला कि बेटा सुरक्षित घर पर ही है। दोबारा संपर्क करने पर नंबर बंद मिला, जिससे स्पष्ट हुआ कि यह साइबर ठगी का प्रयास था।
विशेषज्ञों के अनुसार, “डिजिटल अरेस्ट” एक नया तरीका है जिसमें ठग वीडियो कॉल या फोन के जरिए खुद को पुलिस अधिकारी बताकर व्यक्ति को डराते हैं और कहते हैं कि वह किसी केस में फंस गया है। इसके बाद उसे ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता है।
इसके अलावा ऑनलाइन गेमिंग के जरिए भी ठगी बढ़ रही है। ठग पहले लोगों को गेम में जीत का लालच देते हैं और छोटे इनाम देकर भरोसा जीतते हैं। बाद में बड़ी रकम निवेश करवाकर या फर्जी जीत दिखाकर लाखों रुपये ठग लेते हैं। कई मामलों में पैसे न देने पर दूसरे प्रांतों से फर्जी नोटिस या पुलिस कार्रवाई की धमकी देकर स्टेलमेंट के नाम पर लाखों रुपए जबरन वसूल लिए जाते हैं।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में घबराने की बजाय शांत रहकर जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है। किसी भी अनजान कॉल, धमकी या पैसे की मांग पर तुरंत विश्वास न करें।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल या वीडियो कॉल से सावधान रहें, व्हाट्सएप प्रोफाइल फोटो देखकर भरोसा न करें, तुरंत नजदीकी साइबर सेल या हेल्पलाइन (1930) पर शिकायत दर्ज करें, जागरूकता और सतर्कता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
